Tuesday, June 22, 2010

आँखों में अश्क ..........

आँखों में अश्क ..........


आँखों में अश्क आये जाते हैं , िफर भी हम मुस्कुराये जाते हैं ,
गाना तो आता नहीं हैं , िफर भी हम गुनगुनाये जाते हैं !

संभल के चलते हैं िदल अपना , कहीं कोई तोड़ न दे ,

बेवफाई से भरी दुिनया में , हम वफ़ा िकये जाते हैं !

दुिनया हँसती है हम पर , हमें कोई ऐतराज नहीं,

रोते हुए िदलों को भी हम हँसाए जाते हैं!

टूट गए सारे सपने पल भर में शीशे की तरह ,

िफर भी दूसरों के िलये , हम सपने सजाये जाते हैं!

सारी िजंदगी अंधरे में िबता दी हमने ,

जाते-जाते औरों के िलये दीये जलाये जाते हैं!

रास्ते ही नहीं है जब , मंिजलों की तो आस िकसे ,

रास्तों की तलाश में , हम काटों पर चले जाते हैं !

सूनी पड़ी है राहें िदल की , कोई मुसािफर नहीं राहों में ,

सूनेपन को साथ में लेकर , हम राहों से गुजरते जाते हैं!

प्यास इतनी प्यास है िक , अब तक बुझी नहीं,

पानी तो कहाँ नसीब में , अब तो अश्कों को ही पीये जाते हैं !

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