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Tuesday, December 21, 2010

ऊंटनी कै दुध आले ३ थन होवैं सै !

ताऊ किसी काम से शहर गया हुवा था ! वापसी मे बस मे काफ़ी भीड भाड थी !
ताऊ किसी तरह जबरदस्ती करता हुवा अपने लठ्ठ को लेके बस मे चढ तो लिया !
पर बैठण की जगह मिली कोनी ! ताऊ का माथा दिन भर की परेशानी से कुछ गर्म
तो था ही सो चुप चाप बस का डन्डा पकड कै खडा हो गया !

असल मे ताऊ शहर मे अपने लडके की स्कूल मे गया था ! क्योन्की ताऊ के छौरै नै
स्कूल म मास्टरनीजी तै किम्मै उटपटांग हरकत कर दी थी ! सो मास्टरनीजी ताऊ कै
छोरै पै किम्मै ज्यादा ही भडक ली थी और उस बालक नै स्कूल तैं निकालण की
जुगत भिडावै थी ! और इसीलिये ताऊ को स्कूल मे बुलवाया था ! इब ताऊ भी ताऊ
ही था ! वो भी जाकै मास्टरनी जी तैं भिड लिया !

मास्टरनी जी ने ताऊ को अन्ग्रेजी मे कुछ गालियां दे दी ! वो तो गनीमत की ताऊ का
अन्ग्रेजी से कुछ उधार लेना बाकी नही था सो ताऊ कुछ समझा नही ! और ताऊ को
मुर्ख समझ कै मास्टरनी जी किम्मै ज्यादा ही चटर पटर करण लाग री थी !
अब आप तो जानते ही हैं कि अन्ग्रेजी बोलनै वाले को कोई गांव का ताऊ मिल जाये
तो अपनी अन्ग्रेजी का सारा ज्ञान उसी पर उंडेल देते हैं !

तब ताऊ नै भी अपणी देशी जबाण मे किम्मै उलटा सीधा बोल दिया !
तब मास्टरनी जी चिल्लाई - सिक्युरिटी..सिक्युरिटि... असल मै वो सिक्युरिटी वाले को
बुलवा कर ताऊ को बाहर निकलवाना चाहती थी ! जब वो सिक्युरिटी..सिक्युरिटि...
चिल्लावण लाग री थी तब ताऊ नु समझ्या के यो बोल री सै .. सेक रोटी.. सेक रोटी..!
इब ताऊ का तो पारा चढ लिया और ताऊ बोला - अर मास्टरनी मै क्यूं रोटी सेकूं ?
रोटी सेक तू ! हम तो मर्द आदमी सैं ! रोटी नी सेक्या करते ! और मास्टरनी जी नै
ताऊ को बाहर का रास्ता दिखा दिया ! और ताऊ किसी तरह भूखा प्यासा घर आ गया !

घर लौट कर ताऊ की इच्छा हलवा खावण की हो री थी ! और ताई किम्मै
बणा कै देण आली नही थी ! सो ताऊ नै जोगाड लगाते हुये कहा -
अर भागवान सुण .. जरा ! आज त हल्वा बणा तू !
ताई बोली - क्यूं के काम करकै आया सै ? जो तेरे लिये हलवा बणाऊं ?

ताऊ बोल्या - अर मैं रामलाल तैं शर्त जीत कै आया सूं !
ताई बोली - कुण सी शर्त जीती सै तन्नै ! जरा हमनै भी बता !
ताऊ - मैं बोल्या, ऊंटनी कै दुध आले थन होवैं सै ! रामलाल बोल्या
- कि नही होवैं सै !
ताई - तो तू क्यूं कर जीत गया ? सारी दुनियां जानै सै कि ऊंटनी कै ४
ही थण होवैं सै !
ताऊ बोल्या - नही ३ होवैं सै ! तू मान जा !
ताई - मैं मान ही नही सकती ! झूंठी बात किस तरियां मानी ज्यागी !
ताऊ नै पूछी - इब भी सोच ले ! मानैगी या नही ?
ताई बोली - जा जा फ़ालतू बात ना करया करै ?
इब ताऊ नै किम्मै छोह (गुस्सा) सा आग्या घणे दिनों मै ! और राज भाटियाजी
नै ताऊ को कल ही दो लठ्ठ भेजे थे जरमनी तैं ! सो ताऊ नै तो उठा कै
ताई कै मार दिये कई लठ्ठ ! और ताई तो आज ताऊ का रूप देख कै रोती रोती
एक तरफ़ मै बैठगी ! और आज ताऊ कै हाथ मे मेड इन जर्मनी लठ्ठ देखकै
बोली -- हां बिल्कुळ मानगी थारी बात ! ऊंटनी कै दूध आले ही थन होवैं सैं !
ताऊ बोल्या - सही कह री सै ! रामलाल भी इसी तरह लट्ठ खाकै ही मान्या था !

यदि किम्मै उंच नीच हो जाती तो

परसों रात की बात
अकस्मात
एक क्युट सी छोरी ने ताऊ को रोका
हम समझे पहचानने मे हो गया धोखा !
हम ताऊ-सुलभ लज्जा से
नजर झुकाए गुजर गये
छोरी के केश मारे गुस्से के बिखर गये
जोर जोर से चीखने चिल्लाने लगी-
गांव के जवान लोगो, आवो
इस शरीफ़जादे ताऊ से मुझको बचाओ
मैं पलको मे अवध की शाम
होठों पर बनारस की सुबह
बालों मे शबे-मालवा
और चेहरे पर बंगाल का जादू रखती हूं
फ़िर भी इस लफ़ंगे ताऊ ने मुझे नही छेडा
क्या मैं इसकी अम्मा लगती हुं ?
ताऊ बोल्यो अरे छोरी बात तो तू सांची कहवै सै
पर मन्नै या बतादे
यदि किम्मै उंच नीच हो जाती
तो ताई लठ्ठ लेकै
के थारै बाप के पास जाती ?

ताऊ ने करवाया ताई और भैंस का बीमा

ताऊ ने करवाया ताई और भैंस का बीमा



बीमा एजेंट बड़ा मायूस हो गया , जब ताऊ से उसका बीमा का काम नही बना ! पर ताऊ के दिमाग म्ह तो खुराफात ही चल री थी ! इब ताऊ उस एजेंट तैं बोल्या   -- अरे तू एक काम कर ! मेरा बीमा करना तो छोड़ और तू मेरी लुगाई का और भैंस का बीमा करदे ! इब एजेंट तो हो गया बिल्कुल खुश ! और जितना भी बड़ा बीमा हो सकता था ! उतना बड़ा बीमा ताई का और ताऊ की भैंस का करके चला गया ! इधर ताऊ ने प्लान बना रक्खा था ! उसी के अनुसार उसने इतने बड़े २ बीमे करवाए थे !



इब ताऊ के चैन तैं बैठण आला था ? दो तीन महीने हुए भी नही थे की ताऊ ने अपनी लुगाई और भैंस को अपनी ससुराल यानी ताई के मायके भेज दिया और ख़ुद पहुँच लिया पुलिस थाने में !



थाने में जाकै ताऊ बोला - थानेदार साब ! मेरी लुगाई और भैंस मर गी सै ! रपोर्ट लिख ल्यो ! इब थानेदार नै पूछी की ताऊ क्यूँकर मर गी ? के बेमारी हुई थी ? ताऊ बोल्या -- जी ये तो मन्नै मालुम नही , पर बस  उनकी उम्र पुरी हो ली थी सो वो दोनु एक ही साथ मर ली !  थानेदार को बड़ा आश्चर्य हुवा और उसको कुछ शक पड़ गया ! इधर ताऊ भी दुनियादारी के धक्के खा खा के होशियार हो चुका था ! सो थानेदार के साथ गाम आली भाषा में तोड़ कर लिया ! यानी दान-दक्षिणा दे के रपोर्ट लिखवा कर आगया ! और बीमा कम्पनी म्ह क्लेम लगा दिया !

थोड़े दिन में ताऊ का क्लेम पास हो गया और ताऊ ने सारे रुपये क्लेम के हथिया लिए ! और थोड़े दिनों बाद ताई को और भैंस को वापस बुलवा लिया !  उसने पहचान छुपाने को भैंस के सींग तोड़ डाले और उसकी पूंछ काट डाली ! लेकिन गाम में ताऊ से जलने वाले भी कई थे ! उनसे ये सहन ही ना हो री थी की ताऊ जिंदा बैठी ताई के नाम से क्लेम लेके मजे करण लाग रया सै !



उन लोगो ने बीमा कम्पनी म्ह जाकै शिकायत दर्ज करवा दी ! और बीमे कम्पनी वालो ने पुलिस थाने में रपोर्ट कर दी ! और वो पुलिस लेके ताऊ के घर तफ्तीश करने आ धमके ! इब पुलिस वालो ने बड़े ध्यान से भैंस को देखा और बोले -- ताऊ ये भैंस तो वो नही सै  जिसका बीमा करवाया था ! सो इसका क्लेम तो ठीक सै ! इब ताई नै बुला !  ताई को देख कर पुलिस आले बोले -- अरे ताऊ ये तो वो की वो ताई सै ! ये तूने बहुत बड़ा जुल्म करया सै !  बोगस क्लेम और धोखाधडी का केस बनेगा !



इब ताऊ बोल्या -- भाई मैं तो थारी ताई को भी इस भैंस जैसी ही बना देता , पर क्या करूँ ? ना तो थारी ताई के सींग सै और ना ही पूंछ सै !

Saturday, December 18, 2010

ताई, छोरी और ट्रेफिक हवलदार

ताई, छोरी और ट्रेफिक हवलदार



ताऊ का शहर के अस्पताल मे आपरेशन हुया था ! सो ताई
को शहर जाणा था ! सो ताई चढ ली शहर जाण आली बस मै !
बस मै घणी ठाडी भीड हो री थी ! बैठण की जगह कितै भी नही थी !
आगे आगे की सब सीटों पै कालेज जाण आले छोरे बैठे थे !
ताई को अनदेखी सी करके सारे छोरे सीटों पै जमे ही रहे !
कोई भी ना उठया ! ताई नै थोडी देर तो इन्तजार किया फिर
वहीं बस के बोनट पर बैठ गई !
थोडी देर बाद दो तीन कालेज जाण आली छोरियां अगले स्टाप
से बस मै चढी ! उन छोरीयां के चढते ही बैठे हुये लडकों ने
उनके लिये सीट खाली कर दी और अपनी सीटों पर उन छोरियों
को बैठा लिया और खुद खडे हो लिये ! ये देख कर ताई को
किम्मै छोह (गुस्सा) सा आगया ! ताई उन लडकों से तो किम्मै
ना बोली पर उन छोरियां तैं बोली - इतना इतराणै (गुरुर) क्युं
लाग री हो ? आज नही तै कल थमनै भी इसी बोनट पै आणा सै !


शहर पहुंच कै ताई बस तै उतर ली और अस्पताल की तरफ़ चाल
पडी ! रास्ते मै चोराहा पार करणा था सो ताई नै लाल पीली
लाइट का किम्मै बेरा था नही सो वो तो चाल पडी मूंह ठा के !
लाल लाइट मै चोराहा पार करते देख कै, ट्रेफ़िक होलदार सीटी
मारण लाग ग्या ! पर ताई तो सीधी ही चाली जावै थी ! फ़िर
दोड कै होलदार साब नै ताई को रोका !
और बोला- क्युं ताई मरण का सोच कै आई सै के ?
ताई- अरे बेटा मैं क्युं मरण लागी ! तैं ढंग सै नही बोल सकदा के ?
या तनै बात करण की तमीज नही सिखाई तेरे घर आला नै ?
होलदार-- ताई मैं इतनी देर तैं सीटी मारण लाग रया सूं अर तैं तो
रुकदी ही नही ?
ताई बोली-- अरे तेरी के अक्ल खराब हो राखी सै ?
इब मेरी या उम्र के तन्नै सीटी पर रुकण की दिखै सै ?
अपनै जमानै मै तो मै एक सीटी पर ही रुक जाया करै थी !
और छोह मै आके ताई नै होलदार के दो कान तले बजा दिये !
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